
cirt today : 28
क्षत्रिय ग्रुप की जानिब से समूह लग्न के ईस कार्यक्रम में उपस्थित गुजरात विधानसभा के उपनेता और दानीलीमडा विधानसभा के लोकप्रीय विधायक शैलेष परमार, गुजरात विधानसभा में एकमात्र मुस्लिम विधायक और मेरे छोटे भाई समान ईमरान खेडावाला, अहमदाबाद म्युनीसीपल कोर्पोरेशन में विपक्ष के नेता, हमेशा शहर के लोगो की समस्या को ठोसरुप से रखनेवाले, जुझारु शहेजादखान पठाण, शरीफखान, गुजरात प्रदेश समीती के बहुत ही अभ्यासु, नेता नईम मीरझा और यहां उपस्थित भाईयो और बहनो का मैं ग्यासुद्दीन शेख स्वागत करता हूं।
सबसे पहले आज महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का प्लेन क्रेश में मौत हुई है उसके लिए मैं और कांग्रेस पक्ष हार्दिकरुप से श्रद्धांजलि अर्पित करते है और ईश्वर से प्रार्थना करते है कि उनके परिवार को सांत्वना दे।
आज के वक्त और हालात की जरुरत यह है की जिस तरीके से समाज में शादियो का जो मामला बना है कि अल्लाह ईश्वर ने अगर किसी को दौलत दी है तो शादिया बहुत ही महंगी हो रही है और वह करता ही भी है तो वह समझ में भी आता है लेकिन लाखो रुपयो का कर्जा करके बाद में पुरी जिंदगी व्याज के चक्कर और कर्ज चुकाने में परिवार की जीदगी नीकल जाती है। यह देखा देखी का मामला है। आप स.अ.व. ने भी सुन्नत बताई है उसके मुताबिक हम शादियां करे। कम खर्च से शादी करने पर जो पैसा बचता है उसे हमारी जो आनेवाली पीढी के बच्चे है उनके एज्युकेशन पर हम खर्च करे वह बहेतर रहेगा।
अल्लाह ईश्वरने पैसा दीया है और वह बडी शादी कर रहा है तो साथ साथ में गरीब मझलुम और चैवा के जो लडके लडकियां है उनको साथ में लेकर 25-50 का समूह लग्न का आयोजन करना चाहीए। इससे एक मीशाल कायम होगी। लेकिन हम देख रहे है कि, लोग ज्यादा से ज्यादा बेफजुल खर्च शादीयो में कर रहे है। मैं उम्मीद करता हूं की यहा पर समूह लग्न में जो लोग आये उनको बहुत मुबारकबाद। विशेष रुप से यहां जो हमारी बहने बैठी है, वह बहुत मुबारकबाद के लायक है। क्योंकि अगर समूह लग्न या इजतिमा में शादी या नीकाह करने की बात आती है तो सचसे पहले ओब्जेक्शन हमारी बहने लेती है। दुनिया क्या कहेगी, हमे लोगो को खाना नही खिलाने का? ईस प्रकार के सवाल खडेकर समूह लग्न में शादी करने से मना करती है।
ईस तरह लोगो को शादी में खाना खीलाव और बाकी की जीदगी भूखे गुजारो। हमारी बहनो को संभलना चाहीए। आदमी दुनीया में कीसी से नही डरते सिर्फ औरत से ही डरते है। अगर महिलाए समझ जाए तो यह प्रोब्लेक सोल्व हो जाएगा।
गुलुभाई खत्री और उनका जो ट्रस्ट है वह सिर्फ समूह लग्न नहीं करता है लेकिन गरीच, यतीम, बेवा और मिसकीन लोगो का भी काम करता है। उनकी खिदमत करता है। रमजान महिने की आमद आमद है, में सभी से अपील करता हूं कि, सामूहिक रुप से जकात को ईक्ट्ठा करना चाहिए और वह जकात का पहला हक्कदार हमारे रिश्तेदार है, हमारे पडोशी है, हमारे समाज के लोग है। हमारे घर में तो ८-१० प्रकार की इफतारी बन चुकी है लेकिन कोई गरीब एक खजूर के लिए भी भूखा न रह जाए उसकी फिकर हमे करनी पडेगी। जकात का सही ईस्तेमाल ही और जकात गरीच, यतीम, बेवा और मिसकीन को सही तरीके से पहुंचे उसका हमें ख्याल रखना चाहिए।
अभी हमने देखा कि बहुत बडा कार्यक्रम ठाकोर समाज ने किया वह मुबारकबाद के लायक है। हम तो एक पार्टी के लोग यहां स्टेज पर मौजुद है लेकिन हमे ठाकोर समाजने बताया की एक स्टेज पर काग्रेस और भाजपा के राजनेता आकर किस प्रकार से समाज की बहेतरी के लिए कार्य करते है। समाज को भी ईस कार्यक्रम से सिखना पडेगा और उस कार्यक्रम में उन्होने एलान किया की, अब से ठाकोर समाज में समूह लग्न ही होगे। अगर समाज का व्यक्ति उसके खिलाफ अकेले शादी करेगा तो समाज उसे भारी जुर्माना वसूलेगा।
मैं मानता हूं कि, मुस्लिम समाज और उलमा ए इकराम को भी सोचना चाहिए की इस तरीके से हमें भी समूह शादियां ही करनी चाहीए अगर दिगर समाज ऐसा कर रहे है तो हमें भी वही रास्ता समूह शादी का अपनाना चाहिए। मुस्लिम समाज को मसलक फिरका दरकिनार कर कलमे की बुनियाद पर संगठित होकर एक प्लेटफार्म पर आना चाहिए। अगर पाटीदार समाज भी एक होकर इकट्ठा हो सकते है, ठाकोर क्षत्रिय समाज भी एक हो सकते है, तो फिर मुस्लिम समाज को भी एक होना चाहिए।
हर समाज के पास एक नेता होता है तो लेकिन अफसोस की बात है कि मुस्लिम समाज के पास अपना मुस्लिम नेता ही नहीं है उसका सबसे बडा कारण हसद है, एक दूजे का स्वीकार करने कोई तैयार ही नही है। हर आदमी यह कहता है कि उसका क्या आता है? अब तो भाजपा के १४ साल के शासन ने बता दिया की तुम्हारे समाज का कुछ नही आता। अगर अब भी हम नहीं समझे तो ईसी तरीके से मोब लीचींग, ईसी तरीके से बुलडोजर चलता रहेगा।
ईस लिए मैं यह कहकर अपनी बात पूर्ण करता हूं कि, मुस्लिम समाज को हर मसलक फिरका दरकिनार करके, हर पोलिटीकल पार्टी को दरकिनार करके, जैसे ठाकोर और पाटिदार समाज ने करके दिखाया उसी तरह मुस्लिम समाज को एक लाईन में आकर, सर जोडकर कलमे की बुनियाद पर संगठित होकर एक प्लेटफार्म पर आकर समाज की बहेतरी के लिए कार्य करना चाहिए।










